लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

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नई दिल्ली, नीलू सिंह। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष को नहीं बोलने देने और आठ सदस्यों के निलंबन से नाराज विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष ने मंगलवार को ओम बिरला को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा है। नोटिस पर 118 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ तीन अविश्वास प्रस्ताव आए हैं। पर, पिछले 74 वर्षों में अध्यक्ष के खिलाफ कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है। वहीं 1967 में तत्कालीन अध्यक्ष नीलम संजीव रेड्डी, 2001 में तत्कालीन अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी, वर्ष 2011 में मीरा कुमार और 2020 में ओम बिरला के पहले कार्यकाल में नोटिस लाने की बात हुई थी, पर ऐसा नहीं हुआ।
लोकसभा अध्यक्ष ने महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया है कि उन्हें पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी विपक्ष के नोटिस की जांच करें। सूत्रों के अनुसार, बिरला ने महासचिव को निर्देश दिया है कि वह इस नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई करें। सचिवालय का कहना है कि नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई, पार्टी के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने विपक्ष की कई दूसरी पार्टियों के नेताओं के साथ लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपा। नोटिस पर कांग्रेस, सपा, डीएमके एवं राजद सहित कई सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, टीएमसी इससे दूर रही। लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपने के बाद गौरव गोगोई ने कहा कि महासचिव को संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस सौंपा गया है। नोटिस में कहा गया है कि लोकसभा अध्यक्ष जिस तरह कार्यवाही का संचालन कर रहे हैं, वह खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण है। विपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता। नोटिस में कहा गया है कि दो फरवरी को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते समय अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया। यह कोई अकेली घटना नहीं है। हमेशा ही ऐसा होता है कि राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जाता। नोटिस में आठ सदस्यों के निलंबन का मुद्दा भी उठाया है। विपक्ष ने अपने नोटिस में कहा है कि तीन फरवरी को आठ सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया। उन्हें केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए दंडित किया जा रहा है। नोटिस में निशिकांत दुबे का नाम लिए बगैर पूर्व प्रधानमंत्रियों पर आपत्तिजनक टिप्पणियों का उल्लेख है। इसके साथ नोटिस में लोकसभा अध्यक्ष के पांच फरवरी को दिए उस वक्तव्य का भी हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि चार फरवरी को कांग्रेस के कई सदस्य प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे। इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में नहीं आए। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि यह टिप्पणियां कांग्रेस के सदस्यों के खिलाफ खुले तौर पर झूठे आरोप लगाने वाली और अपमानजनक प्रकृति की हैं। यह बयान इस संवैधानिक पद के दुरुपयोग को दर्शाता है।

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