वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत पर 26 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ (रेसिप्रोकल टैरिफ) लगाने की घोषणा की। व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में ट्रंप बोले, भारत बहुत सख्त है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन उन्होंने हमारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। मेक अमेरिका वेल्दी अगेन इवेंट में रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा, भारत अमेरिका पर 52 प्रतिशत तक टैरिफ लगाता है, लेकिन हमने भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ ही लगाया है। उन्होंने कहा कि वह सभी आयातित उत्पादों पर दस प्रतिशत टैरिफ लगाएंगे और 60 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करेंगे।
व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर लगाए जाने वाले नए टैरिफ इस सप्ताहांत से लागू होने वाले हैं। ‘बेसलाइन’ 10 प्रतिशत टैरिफ 5 अप्रैल से और विभिन्न साझेदारों पर उच्च दर 9 अप्रैल से लागू होगी।
ट्रंप द्वारा टैरिफ़ लागू किए जाने के बाद यूरो के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि ट्रंप की घोषणा से पहले अमेरिकी शेयर मार्केट वॉल स्ट्रीट में उछाल देखने को मिला।
इसी तरह अमेरीकी राष्ट्रपति ने वियतनाम पर 46 प्रतिशत, स्विटजरलैंड पर 31 प्रतिशत, कंबोडिया पर 49 प्रतिशत, दक्षिण अफ्रीका पर 30 प्रतिशत, इंडोनेशिया और ताइवान पर 32 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया पर 25 प्रतिशत, मलेशिया 24 प्रतिशत, वेनेजुएला पर 15 प्रतिशत, यूके, ब्राजील, यूक्रेन और सिंगापुर पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया। ट्रंप ने चीन से आयात होने वाली वस्तुओं पर 34 प्रतिशत और यूरोपीय संघ पर 20 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। उन्होंने कहा है कि कुछ देशों पर वह इससे अधिक भी शुल्क लगाएंगे।
टैरिफ की घोषणा करने के लिए ट्रंप बुधवार को व्हाइट हाउस के रोज गार्डन पहुंचे। वहां उन्होंने अपने संबोधन में टैरिफ को लेकर उठाए गए कदम को अमेरिका के हित में बताया। उन्होंने कहा,‘मैं दुनिया भर के देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने के लिए एक ऐतिहासिक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करूंगा। पारस्परिक टैरिफ का मतलब है, वे हमारे साथ जैसा करते हैं, हम उनके साथ वैसा करेंगे।’ ट्रंप ने कहा कि यह अमेरिकी इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। ट्रंप ने इस घोषणा को ‘मुक्ति दिवस’ का नाम दिया है जिसका उद्देश्य वर्षों से चली आ रही कथित रूप से अनुचित व्यापार प्रथाओं का मुकाबला करना है।
मालूम हो कि ट्रंप के इस कदम को लेकर कई अर्थशास्त्रियों ने पहले से ही चेतावनी दे रखी है कि इससे व्यापार युद्ध छिड़ेगा जिसका प्रतिकूल असर अमेरिकी अर्थव्य्वस्था पर भी पड़ सकता है।
